चीजें अभी और भी आ रही हैं। लोडिंग जारी है।
जब एनोनिमिटी बात हुई तो एक वेबसाइट का नाम जेहन में आता है..experience project. दरअसल यह एक यूरोपियन लोगों के जीवन अनुभव से पटा एक अनुभव शेयर करने का प्लेटफार्म था। लोग अपने जीवन की घटनाएं विचार, अहसास सब कहानियों की शक्ल में लिखते थे। उस वक्त लिखने वाले लोगों की पहचान समझ नहीं आती थी लेकिन इतना जरूर समझ में आता था लिखने वाले लोग अलग - अलग हैं। पढ़ने वाले लोग सिर्फ इस बात से वास्ता रखते थे कि लिखा अच्छा है या नहीं। शायद आज भी पाठक यही खोजते हैं कि अच्छा लिखा है या नहीं।
लोग कुछ अच्छा पढ़ना चाहते हैं। लेकिन किसके लिए अच्छा यह विचारणीय है। यदि केवल मनोरंजन के लिहाज से पाठ्य सामग्री खोज रहे हैं तो 'रस माधुरी' और यौवन की उत्तेजक कहानियां और रोमांचक, इंद्रजाल वाली सामग्री भी बाजार में उपलब्ध है और यदि केवल मनोरंजन से स्वयं को बहलाना जरूरी नहीं मानते हों और कुछ रस हीन पढ़ना बर्दाश्त कर सकें तो ज्ञानवर्धक चीजें और जरूरी चीजें भी पुस्तकालय में उपलब्ध है।
समस्या यह है कि समाज तेजी से बदल रहा है। मान्यताएं भी बदल रही हैं क्योंकि लोग बदल रहे हैं। गंभीर विषय कहीं किसी भारी - भरकम डिक्शनरी की भूमिका की तरह नजरंदाज किए जा रहे हैं।
समय बदल रहा है।

