महालया की ढेरों शुभकामनाएं।(भूली - बिसरी यादें।)

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महालया के सुबह में जब नींद खुली तब सुबह के धुंधलके में कई यादें उमड़ आईं। धीमे - धीमे गूंजता पटाखों का यदा - कदा प्रस्फुटन बहुत मीठा सा लगा। लगा जैसे कहीं तारे फूट रहे हों। अभी भी जब मैं यह सब लिख रहा हूॅं, लगभग पैंतालीस मिनट से इस सुबह को धीरे - धीरे ढलते देख रहा हूॅं।
मैं उस पीढ़ी के बच्चों में आता हूॅं जिसने लालटेन से लेकर सेल्युलर तक का सफर तय किया है और मेरी पीढ़ी के लोग जिनका बचपन खासकर पश्चिम बंगाल में गुजरा है उन्हें पता है कि आज के दिन कितनी नाॅसटैल्जिक फिलिंग आती है। सुबह -सुबह दूरदर्शन में महालया का प्रसारण और उसे शुरू से देखने की होड़। उनीदी ऑंखों से माॅं के जगाए जाने पर जल्दी-जल्दी हाथ-मुॅंह धोकर टेलीविजन के सामने बैठना और कभी कभी ऊंघते हुए फिर सो जाना....
जिन्हे अब भी वह समय याद आए इस वीडियो को सुन सकते हैं। सुन सकते हैं क्योंकि यह विडियो एक ऑडियो फॉर्मेट में है।

और जो अब भी दूरदर्शन के पुराने महालया को मिस कर रहे हों वे ये वीडियो देख सकते हैं।


एक बात तो मुझे भी सही लगती है कि श्रीमती संयुक्ता बंदोपाध्याय जितनी बेहतर माता दुर्गा के अवतार में लगी हैं उतनी अच्छी कोई एक्ट्रेस नहीं लगीं। खैर अपना - अपना नजरिया है। सभी को दुर्गापूजा की आगामी शुभेच्छाएं।
सब स्वस्थ रहें प्रसन्न रहें।
अपने विचार कॉमेंट के माध्यम से हम - तक जरूर पहुॅंचाइएगा सभी को हैप्पी दुर्गा पूजा।🙏🙏